सोनौली/नौतनवा
भारत-नेपाल सीमा से सटे कस्बों सोनौली और नौतनवा के बीच इन दिनों मेले की रौनक धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगी है। नगरों की सरहद पर लगने वाला पारंपरिक मेला अंतिम तैयारियों के दौर में पहुंच चुका है। मेले में बड़े-बड़े रंगीन झूले, बच्चों के मनोरंजन के साधन और सजी हुई दुकानें लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने लगी हैं।
मेला परिसर में ड्रैगन ट्रेन, ब्रेक डांस, नाव झूला समेत कई आधुनिक और पारंपरिक झूले लगाए जा रहे हैं। बच्चों के लिए विशेष खेल उपकरण भी तैयार किए गए हैं। शाम ढलते ही पूरा मेला रंग-बिरंगी रोशनियों से जगमगा उठेगा, जिससे सीमाई क्षेत्र का माहौल पूरी तरह उत्सवमय दिखाई देगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सोनौली और नौतनवा की सीमा पर लगने वाला यह मेला वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है और हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। खासकर बच्चों और युवाओं में मेले को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।
वहीं व्यापारियों ने भी खाने-पीने की दुकानों, खिलौनों, श्रृंगार सामग्री और घरेलू सामान के स्टॉल सजाने शुरू कर दिए हैं। मेले में आने वाले लोगों के लिए विभिन्न प्रकार के व्यंजन और मनोरंजन के साधन आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
आयोजकों के मुताबिक मेले में सुरक्षा, साफ-सफाई, बिजली और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उम्मीद जताई जा रही है कि मेला शुरू होते ही आसपास के ग्रामीण और सीमाई इलाकों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचेंगे।
सीमाई क्षेत्र में सजने वाला यह पारंपरिक मेला न सिर्फ मनोरंजन का केंद्र बनेगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी नई गति देने का कार्य


