सोनौली (महाराजगंज)।
नगर पंचायत सोनौली प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण आज कस्बे का एक बड़ा हिस्सा धूल के आगोश में समाया हुआ है। पिछले चार दिनों से मुख्य मार्ग और मोहल्लों की सड़कों पर जमा मिट्टी अब क्षेत्रीय नागरिकों और राहगीरों के लिए 'जी का जंजाल' बन चुकी है। आलम यह है कि कई मीटर तक मिट्टी का धुआं हवा में तैर रहा है, जिससे न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि लोगों का सांस लेना भी दूषित हो गया है।
सांस के मरीजों के लिए खड़ा हुआ बड़ा खतरा
सड़क पर जमा सूखी मिट्टी वाहनों के गुजरने के साथ ही धूल बनकर हवा में फैल रही है। यह स्थिति अस्थमा और सांस से संबंधित बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने के बावजूद धूल कमरों के भीतर तक जमा हो रही है।
प्रशासन की चुप्पी: 4 दिनों से समाधान का इंतजार
हैरानी की बात यह है कि पिछले 96 घंटों (4 दिन) से यह मिट्टी सड़कों पर यूं ही बिखरी पड़ी है, लेकिन नगर पंचायत सोनौली के जिम्मेदार अधिकारियों की नींद नहीं टूटी है। राहगीरों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है; दोपहिया वाहन चालक फिसल रहे हैं और धूल के कारण दृश्यता (Visibility) भी कम हो गई है।
प्रमुख समस्याएं जो बनीं सिरदर्द:
प्रदूषण का ग्राफ बढ़ा: हवा में धूल के कणों की मात्रा बढ़ने से स्थानीय वायु गुणवत्ता (AQI) बेहद खराब हो चुकी है।
व्यापार प्रभावित: सड़कों के किनारे स्थित दुकानों के सामान धूल से खराब हो रहे हैं, जिससे व्यापारियों में भारी आक्रोश है।
स्वास्थ्य का संकट: बच्चों और बुजुर्गों में गले की खराश और आंखों में जलन की शिकायतें बढ़ रही हैं।
स्थानीय लोगों का आक्रोश:
"नगर पंचायत को कई बार सूचित किया गया, लेकिन सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। अगर जल्द मिट्टी नहीं हटाई गई, तो हम प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।"
निष्कर्ष:
नगर पंचायत सोनौली प्रशासन की यह ढुलमुल कार्यप्रणाली जनता के सब्र का इम्तिहान ले रही है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या महामारी का इंतजार कर रहा है? अब देखना यह है कि खबर प्रकाशित होने के बाद क्या जिम्मेदार अधिकारी जागते हैं या जनता ऐसे ही 'धूल फांकने' को मजबूर रहेगी।


