सोनौली, महराजगंज।
भारत-नेपाल सीमा से सटे कस्बा सोनौली इन दिनों तस्करी के अवैध गोदामों का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। यहां दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक तस्करी का कारोबार बेखौफ तरीके से जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सोनौली में तस्करों का इतना मजबूत नेटवर्क सक्रिय है कि इसे तोड़ना किसी के बस की बात नहीं लगती।
कस्बे और इसके आसपास के क्षेत्रों में दर्जनों अवैध गोदाम संचालित हो रहे हैं, जहां तस्करी का सामान बड़े पैमाने पर रखा जाता है। महुअवा, शेख फरेनी, बरगदही, खनुवा, मदरी और भगवानपुर जैसे ग्रामीण इलाकों से जुड़े तस्करों का इन गोदामों पर जमावड़ा लगा रहता है। बताया जाता है कि इन गोदामों का इस्तेमाल केवल तस्करी के सामान को जमा करने और आगे भेजने के लिए किया जाता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि तस्कर
माफियाओं का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे किसी भी व्यक्ति को डराने-धमकाने से भी पीछे नहीं हटते। कई बार विरोध करने वाले लोगों को धमकाने तक की घटनाएं सामने आती हैं। वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इन अवैध गोदामों पर कार्रवाई करने से कतराती नजर आती हैं, जिससे तस्करों के हौसले और बुलंद हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अकेले रामजानकी चौक से मस्जिद गली तक करीब एक दर्जन ऐसे गोदाम संचालित हैं, जहां सामान्य ग्राहकों की आवाजाही नहीं होती, बल्कि तस्करी के सामान को लाने और ले जाने वाले कैरियरों की ही आवाजाही रहती है।
दिनदहाड़े हो रही तस्करी ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।सूत्रों के हवाले बताया जाता है कि पिछले महीने इसी मार्ग पर स्थित एक गोदाम पर छापेमारी की गई थी और गोदाम संचालक को बुलाकर ताला खुलवाने की कोशिश की गई, लेकिन उसके नहीं आने के कारण गोदाम का ताला नहीं खुल पाया। बाद में उसी गोदाम से फिर तस्करी का कारोबार जारी रहने की बात सामने आई।
इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन अवैध गोदामों और तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।



